जिस प्रकार भू मंडल का आधार मेरु पर्वत है, उसी प्रकार मनुष्य शरीर का आधार
मेरु दंड अथवा रीढ की हड्डी है । मेरुदंड 33 अस्थि खँडोँ के जुडने से बना
है । संभव है इस 33 की सँख्या का संबंध 33 कोटि देवताओँ अथवा प्रजापति
इँद्र ,अष्ट वसु, द्वादश आदित्य और एकादश रुद्र से हो ।भीतर से यह खोखला
रहता है इसका नीचे का भाग नुकीला और छोटा होता है इस नुकीले स्थान के आस
पास का भाग नाङी कँद कहलाता है और इसी मेँ महाशक्ति कुँडलिनी का निवास है

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