Saturday, May 30, 2015

चार वेद

चार वेद
चार वेद : चार ग्रंथ, चार पुरुषार्थ, चार देव। वेद केवल धर्म की किताबें भर नहीं है। इनके पीछे छिपा दर्शन बहुत गहरा और जीवन के अर्थों को समेटे हुए है। ये केवल मंत्रों से भरे ग्रंथ नहीं हैं। संपूर्ण मानव जीवन का सार इनमें है। मानव जीवन में चार प्रमुख पुरुषार्थ हैं अर्थ, काम, धर्म और मोक्ष। चारों वेद इन चार पुरुषार्थों का प्रतीक हैं। इन चार वेदों के चार प्रमुख देवता हैं अग्रि, वायु, सूर्य और सोम(चंद्र)। ऋग्वेद के देवता अग्रि को माना जाता है, यजुर्वेद के देवता पवन यानी वायु, सामवेद के देवता सूर्य और अथर्ववेद के देवता सोम माने गए हैं। ये चारों देवता और चारों वेद
इन चार पुरुषार्थों के प्रतीक हैं।

ऋग्वेद : चार पुरुषार्थों में पहला अर्थ है, शास्त्रों का मानना है कि गृहस्थ का सबसे पहला धर्म है, जीवनयापन के लिए आवश्यक साधन जुटाए। ऋग्वेद अर्थ का ग्रंथ है जिसमें जीवन के लिए आवश्यक अनुशासन और ज्ञान की बातें हैं। अर्थ के लिए श्रम की जरूरी है और श्रम के लिए ऊर्जा यानी शक्ति। अग्रि ऊर्जा और शक्ति के प्रतीक हैं, इसलिए ऋग्वेद के प्रमुख देवता माने गए हैं। अर्थ के लिए परिश्रम करना होता है लेकिन यह परिश्रम भी अनुशासन के तहत हो, अधर्म के मार्ग से प्राप्त किया गया अर्थ पुरुषार्थ नहीं है।
यजुर्वेद : यजुर्वेद काम का ग्रंथ है, यहां काम का अर्थ केवल विषय भोग से नहीं है। काम में कर्म, कामनाएं और मन तीनों शामिल है। यह कर्मकांड प्रमुख वेद है। इसमें यज्ञ का महत्वहै, जो कर्म का प्रतीक भी है। यजुर्वेद के प्रमुख देवता वायु को माना गया है। वायु मन का प्रतीक है, मन वायु की तरह ही तेज चलता है और अस्थिर है। कर्म में श्रेष्ठता के लिए मन को साधना जरूरी है। मन को साधने से ही उसमें कामनाओं का लोप होता है। मन सद्कर्मों और शक्ति, धर्म के संचय में लगता है। कामनाओं का लोप होने के बाद ही हम किसी भी कार्य को एकाग्रता से कम सकते हैं।
सामवेद : साम वेद उपासना का वेद है, धर्म का ग्रंथ है। धर्म के लिए भक्ति यानी उपासना का होना आवश्यक है। जब अर्थ और काम दोनों का साध लिया जाए यानी सांस्कृतिक और धार्मिक अनुशासन से इन्हें जीवन में उतारा जाए तब धर्म का प्रवेश होता है, जीवन में भक्ति आती है। भक्ति और ज्ञान प्रकाश के प्रतीक हैं, इसलिए सामवेद के देवता सूर्य माने गए हैं। जीवन में ज्ञान और भक्ति का बहुत महत्व है। इनको साधने से ही धर्म आता है।
अथर्ववेद : यह ग्रंथ परमशक्तियों या पराशक्तियों का है। जब अर्थ, काम और धर्म तीनों जीवन में उतरते हैं तब मोक्ष का मार्ग खुलता है। मोक्ष कर्म और जन्म के फेर से मुक्ति है, यह मुक्ति ज्ञान से आती है, इसे ब्रह्म ज्ञान कहते हैं। अथर्ववेद ऐसे ही ज्ञान का वेद है। मुक्ति का ज्ञान हमें सारे संकटों से राहत देता है, यानी शीतलता देता है। इसलिए इस ग्रंथ के देवता चंद्र यानी सोम माने गए हैं, जो शीतलता देते हैं।

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प्रभु को दर्सन को लागि तल कीलिक गरि हेर्नु होला