पूर्ण है शिव पूर्ण मेँ कुछ भी अधिक होता नहीँ, पूर्ण न बढता न घटता पाता
नहीँ खोता नहीँ शिव निवासित अखिल व्योम नक्षत्र तारक शास्त्र होम इस पूर्ण
को भी अधिक पूर्ण तुमने किया है शाम्भवी । शिव आश्रित है वेद ग्यान
वाँङ्गमय कला संगीत स्वर शिवमयी है लोकत्रयी गुणत्रयी सृष्टि सँरचना शिव
ही है परब्रह्म सार समर्थ लक्षण व्यँजना इस पूर्ण को भी अधिक पूर्ण तुमने
किया है निरँजना सच तुमने किया है निरँजना ।। ॐ निरँजन निराकार ॐ

No comments:
Post a Comment