Sunday, May 17, 2015

हरे कृष्ण

मनुष्य कुछ भौतिक अवस्था पृाप्त कर लेता है तो लोगों को बताने लगता है ये हमने किया !
ये मकान , ये दुकान , ये बेटा , ये बेटी बहू , नाती जोरों सोरों वयान करता है लोगों के सामने , हमने किया हमारा है भगवान का नाम नही लेता है ऩ उनकी कृपा समझता है
जैसे कुछ खराब हुआ जो वयान करने लायक नही उसे भगवान पर डाल देता है भगवान ने ये मेरे साथ बहुत बुरा किया !
भजना नन्दों का भी यही हाल है मैं गंगा स्नान करके ही भोजन करता हूँ गोबर्धन परिकृमा करके अथवा कामद गिरि परिकृमा करके ही भोजन करता हुँ ६४ माला करके ही अमुक काम करता हूँ !
ये भृम सदियों से चला आ रहा है !
हमारे राधामाधव की जो कृपा होगी उतना ही भजन नाम जप भौतिक काम हो पायेगा !
ना कम ना जादा
अपना कर्म आवस्यक है वो करना हमारा धर्म है कितना होगा ये मेरी जिम्मेदारी नही है !

विधि को विधान जानि हानि लाभ सहिये
जाई विधि राखै राम ताई विधि रहिये !!
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !!

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प्रभु को दर्सन को लागि तल कीलिक गरि हेर्नु होला